तेरी रजा में चलता रहा, जैसे भी तूने चाहा, लगाम मेरी हुईं ढ़ीली, धम से मैं गिरने लगा,
मेरे लोग हुए परेशान, कैसे आया यह तूफान,
प्रश्न बहुत करते रहे,उत्तर था सिर्फ पूर्णविराम।
तेरी रजा में चलता रहा, जैसे भी तूने चाहा, लगाम मेरी हुईं ढ़ीली, धम से मैं गिरने लगा,
मेरे लोग हुए परेशान, कैसे आया यह तूफान,
प्रश्न बहुत करते रहे,उत्तर था सिर्फ पूर्णविराम।
न हो जाना खुली किताब, फट जाएंगे पन्ने पलट पलट
न ही होना बरसाती दरिया, खो जाएगा कही सिमट सिमट
तुम तो फुल गुलाब हो जाना, लहराना डाली पर मटक मटक
खुशबू वो ही ले पायेगा, जो कांटे सहलाए पलक पलक